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हाशिया
कविता
कबीर मारग अगम है, सब मुनिजन बैठे थाकि
कबीर
साखी · लगभग २ मिनट
कबीर मारग अगम है, सब मुनिजन बैठे थाकि।
तहाँ कबीरा चलिगया, गहि सतगुर की सांषि॥९॥
॥
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कबीर माया मोहनी, ‘मोहे जांण सुजांण
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कबीर मारिग कठिन है, कोई न सकई जाय
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हम मसकीन खुदाई बंदे तुम राचसु मन भावै
कबीर
कविता
हम मसकीन खुदाई बंदे तुम राचसु मन भावै
कबीर
२ मिनट का पाठ
हरि जन सुनहि न हरि गुन गावहिं
कबीर
कविता
हरि जन सुनहि न हरि गुन गावहिं
कबीर
२ मिनट का पाठ
सिव की पुरी बस बुधि सारु
कबीर
कविता
सिव की पुरी बस बुधि सारु
कबीर
२ मिनट का पाठ