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पारगी मंहि प्रजली, भई अप्रबल आगि

साखी · लगभग २ मिनट
पारगी मंहि प्रजली, भई अप्रबल आगि।वहती खलिता रह गई, मंल्ल रहे जल त्यागि॥६॥

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