भूखे भगति न कीजै। यह माला अपनी लीजै।हौं माँगो संतन रेना। मैं नाहीं किसी का देना॥माधव कैसी बने तुम संगै। आपि न देउ तले बहु मंगे॥दुइ सेर माँगौ चूना। पाव घीउ संग लूना।अधसेर माँगौ दाले। मोको दोनों बखत जिवालै।खाट माँगौ चौपाई। सिरहाना और तुलाई॥ऊपर कौ माँगौ खींधा। तेरी भगति करै जनु बींधा॥मैं नाहीं कीता लब्बो। इक नाउ तेरा मैं फब्बो॥कहि कबीर मन मान्या। मन मान्या तो हरि जान्या॥155॥

