कृष्ण नाम जब तैं प्रवन सुन्यौ री आली,भूली री भवन हौं तो बावरी भई री।भरि-भरि आवैं नैन, चितहूं न परै चैन,मुखहू न आवैं बैन, तन की दसा कछु और भई री॥जेतक नेम धरम किए री मैं बहु बिधि,अंग अंग भई हौं तौ स्रवन मई री।नंददास जाके नाम सुनत ऐसी गति,माधुरी मूरति है धौं कैसी दई री॥

कृष्ण नाम जब तैं प्रवन सुन्यौ री आली
नंददासपद · लगभग २ मिनट