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‘दया’ प्रेम उनमत जे, तन की तनि सुधि नाहिं

दोहा · लगभग २ मिनट
‘दया’ प्रेम उनमत जे, तन की तनि सुधि नाहिं।झुके रहैं हरि रस छके, थके नेम ब्रत नाहिं॥

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