‘दया’ प्रेम उनमत जे, तन की तनि सुधि नाहिं।झुके रहैं हरि रस छके, थके नेम ब्रत नाहिं॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
श्री गोबिंद के गुनन तेहिं, भनत रहौ दिन-रैनदयाबाईकविताश्री गोबिंद के गुनन तेहिं, भनत रहौ दिन-रैनदयाबाई२ मिनट का पाठ
हरि भजते लागै नहीं, काल-व्याल दुख-झालदयाबाईकविताहरि भजते लागै नहीं, काल-व्याल दुख-झालदयाबाई२ मिनट का पाठ