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नित निशि बसत पिशाच ऊँहिं, बनिक न टिकउ निकेत

दोहा · लगभग २ मिनट
नित निशि बसत पिशाच ऊँहिं, बनिक न टिकउ निकेत।द्रुत भज भल यदि चहसि तो, कह जमाल इहि हेत॥

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