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हाशिया
कविता
जस मदमातल हथिआ, हुमकति जाय
रहीम
बरवै · लगभग २ मिनट
कुलटा
जस मदमातल हथिआ, हुमकति जाय।
चितवत छैल तरुनिआ, मुह मुसुकाय॥२४॥
॥
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जमुना-तीर तरुनिअहि, लखि भौ सूल
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जहवाँ जगे रइनिआँ, तहवाँ जाउ
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इक नाहीं इक पीर, हिय रहीम होती रहै
रहीम
कविता
इक नाहीं इक पीर, हिय रहीम होती रहै
रहीम
२ मिनट का पाठ
सोवत सब गुरु लोगवा, जानेउ बाल
रहीम
कविता
सोवत सब गुरु लोगवा, जानेउ बाल
रहीम
२ मिनट का पाठ
होइ कत कारि बदरिआ, बरखत पाथ
रहीम
कविता
होइ कत कारि बदरिआ, बरखत पाथ
रहीम
२ मिनट का पाठ