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हाशिया
कविता
पहिरे लाल अछुअवा, तिअ गज-पाय
रहीम
बरवै · लगभग २ मिनट
मध्या-अभिसारिका
पहिरे लाल अछुअवा, तिअ गज-पाय।
चढ़िकै नेह-हथियवा, हुलसत जाय॥७६॥
॥
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अ−
अ+
पिछला
पहिरि बसन जरितरिआ, पिअ के हेत
अगला
पिअ मूरति चित-सरिया, देखत बाल
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रहिमन जग की रीति, मैं देखा रस ऊख मैं
रहीम
कविता
रहिमन जग की रीति, मैं देखा रस ऊख मैं
रहीम
२ मिनट का पाठ
होइ कत कारि बदरिआ, बरखत पाथ
रहीम
कविता
होइ कत कारि बदरिआ, बरखत पाथ
रहीम
२ मिनट का पाठ
रहिमन नीर पखान, बूड़ै पै सीजै नहीं
रहीम
कविता
रहिमन नीर पखान, बूड़ै पै सीजै नहीं
रहीम
२ मिनट का पाठ