मेरी सूचीपढ़ना शुरू करें

ऊधो! प्रीति करि निरमोहियन सों को न भयो दुख दीन?

पद · लगभग २ मिनट
ऊधो! प्रीति करि निरमोहियन सों को न भयो दुख दीन?।सनत समुझत कहत हम सब भई अति अप्रबीन ।। 1 ।।अहि कुरंग पतंग कुरंग कंज चकोर चातक मीन।बैठि इन की पाँति अब सुख चहत मन मतिहीन ।। 2 ।।निठुरता अरू नेह की गति कठित परति कही न।दास तुलसी सोच नित निज प्रेम जानि मलीन ।। 3 ।।

अब कुछ और पढ़ें