जे को मरै मरन है मीठा, गुरु प्रसादि जिनहीं मरि दीठा ॥ टेक॥मुवा करता मुई ज करनी, मुई नारि सुरति बहु धरनी।मूवा आपा मूवा माँन, परपंच लेइ मूवा अभिमाँन ॥राम रमे रमि जे जन मूवा, कहै कबीर अविनासी हुआ ॥46॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+