जोगी कहहिं जोग भल मीठी अवर न दूजा भाई।रुंडित मुंडित एकै सबदी एकहहि सिधि पाई।हरि बिन भरमि भूलानै अंधा।जा पहि जाउ आप छुटकावनि ते बाँधे बहु फंदा।जह ते उपजी तही समानी इहि बिधि बिसरी तबही॥पंडित गुणी सूर हम दाते एहि कहहिं बड़ हमही।जिसहि बुझाए सोई बूझै बिनु बूझैं क्यों रहिये॥तिस गुरु मिलै अंधेरा चूके इन बिधि प्राण कु लहियै।तजिवा बेदा हने बिकारा हरि पद दृढ़ करि रहियै॥कह कबीर गूँगैं गुण खाया पूछे ते क्या कहियै॥170॥

जोगी कहहिं जोग भल मीठी अवर न दूजा भाई
कबीरपद · लगभग २ मिनट