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हाशिया
कविता
जेते सुख संसार के, इकट्ठे किए बटोर
मलूकदास
दोहा · लगभग २ मिनट
जेते सुख संसार के, इकट्ठे किए बटोर।
कन थोरे कांकर घने, देखा फटक पछोर॥
॥
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जे दुखिया संसार में, खोवो तिनका दुक्ख
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