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हाशिया
कविता
एक सीस चहुं सीस पुनि, पंच सीस षट सीस
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
एक सीस चहुं सीस पुनि, पंच सीस षट सीस।
दश सिर और सहस्त्र सिर, नमत सकल जगदीस॥
॥
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देह कृत्य सब करत है, उत्तम मध्य कनिष्ट
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आज्ञा मंहिं रहत हैं, सप्त दीप नौ खंड
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कविता
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सुंदरदास
कविता
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सुंदरदास
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