पेट तें बाहिर होतहि बालक आइकैं मात पयोधर पीनौं।मोह बढ्यौ दिन ही दिन और तरुन्न भयौ त्रिय के रस भीनौं॥पुत्र पउत्र बंध्यौ परवार सु ऐसि हि भांति गये पन तीनौं।सुंदर राम कौ नाम बिसारिसु आपुहि आपु कौ बंधन कीनौं॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
झूठौ जग एन सुन नित्य गुरु बैन देषेसुंदरदासकविताझूठौ जग एन सुन नित्य गुरु बैन देषेसुंदरदास२ मिनट का पाठ
प्रात ही उठत सब पेट ही की चिंता सबसुंदरदासकविताप्रात ही उठत सब पेट ही की चिंता सबसुंदरदास२ मिनट का पाठ