मुख्य पाठ पर जाएँ
लेखक, शीर्षक, विधा, संग्रह या पाठ खोजें
Roman में लिखें, हिंदी सुझाव चुनें।
मेरी सूची
पढ़ना शुरू करें
लेखक, शीर्षक, विधा, संग्रह या पाठ खोजें
Roman में लिखें, हिंदी सुझाव चुनें।
खोजें और पढ़ें
कहानियाँ
कविताएँ
उपन्यास
निबंध
रस से पढ़ें
लेखक
संग्रह
हाशिया
कविता
सुन्दर यह मन भूत है, निस दिन बकतें जाइ
सुंदरदास
दोहा · लगभग २ मिनट
सुन्दर यह मन भूत है, निस दिन बकतें जाइ।
चिन्ह करै रोवै हंसै, खातें नहीं अघाइ॥
॥
साझा करें
सहेजें
अ−
अ+
पिछला
हाथी मंहि देखिये हाथी कौ अभिमान
अगला
सान्यौ घर मंहि कहै, हूँ अपने घर जाऊँ
अब कुछ और पढ़ें
कामिनी कौ अंग अति मलिन महा अशुद्ध
सुंदरदास
कविता
कामिनी कौ अंग अति मलिन महा अशुद्ध
सुंदरदास
२ मिनट का पाठ
ऊरध पाइ अधौमुख ह्वै करि
सुंदरदास
कविता
ऊरध पाइ अधौमुख ह्वै करि
सुंदरदास
२ मिनट का पाठ
कोउक निंदत कोउक बंदत
सुंदरदास
कविता
कोउक निंदत कोउक बंदत
सुंदरदास
२ मिनट का पाठ