सूवा पकरि नली रह्यौ, वह कहुं पकर्यौ नांहि।ऐस सुन्दर आपु सौं, पर्यौ पींजरा मांहि॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
झूठे हाथी झूठे घोरा झूठे आगे झूठा दौरासुंदरदासकविताझूठे हाथी झूठे घोरा झूठे आगे झूठा दौरासुंदरदास२ मिनट का पाठ