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तबतें और न कछु सुहाई

पद · लगभग २ मिनट
तबतें और न कछु सुहाई।सुंदर स्याम जबहि तैं देखे खरिक दुहावत गांइ॥आवति हुती चली मारग सखि! हौं अपने सतभाई।मदन गोपाल देखिके इकटक रही ठगी मुरझाइ॥बिसरी लोक-लाज गृह-कारज बंधु पिता अरु माइ।दास चतुर्भुज प्रभु गिरिधर तनु-मनु लियौ चुराइ॥

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