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हाशिया
कविता
गुरुता फबै रहीम कहि, फबि आई है जाहि
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
गुरुता फबै रहीम कहि, फबि आई है जाहि।
उर पर कुच नीके लगैं, अनत बतौरी आहि॥४७॥
॥
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गुन ते लेत रहीम जन, सलिल कूप ते काढ़ि
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चढ़िबो मैन-तुरंग पर, चलिबो पावक माँहिं
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रहीम
कविता
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ओछे को सतसंग, रहिमन तजहु अँगार ज्यों
रहीम
कविता
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रहीम
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रहीम
कविता
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रहीम
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