नैनन के आगे प्यारी बिलपत है बिहारी,असुँवनि प्रेम जल धार चली जाइ री।कौन प्रेम केहि फंद परे हैं रँगीले लाल,अटपटी गति हेरे हियो अकुलाइ री॥हित ध्रुव चेति के किशोरी गोरी धीर धरि,नैना नेह नीर भरि लीन्हें उर लाय री।प्रेम को समुद्र फिरि गयो है सबनि पर,जहाँ-तहाँ सखी धर परी मुरझाइ री॥

नैनन के आगे प्यारी बिलपत है बिहारी
ध्रुवदासकवित्त · लगभग २ मिनट