आपस की फूट ही तें सारे हिंदुवान टूटेभूषणकविताआपस की फूट ही तें सारे हिंदुवान टूटे
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११ रचनाएँ

आपस की फूट ही तें सारे हिंदुवान टूटेभूषणकविता
राखी हिंदुवानी हिंदुवान को तिलक राख्योभूषणकविता
चोरी रही मन में ठगोरी रूप ही में रहीभूषणकविता
ऊँचे घोर मंदर के अंदर रहनवारीभूषणकविता
अकथ अपार भवपंथ के बिलोकीभूषणकविता
उतरि पलँग तें न दियो हैं धरा पै पगभूषणकविता
जढ़त तुरंग चतुरंग साजि सिवराजभूषणकविता
इंद्र जिमि जंभ पर बाड़व ज्यों अंभ परभूषणकविता
छूटत कमान बान बंदूकरु कोकबानभूषणकविता
बेद राखे बिदित पुरान परसिद्ध राखेभूषणकविता
निकसत म्यान ते मयूखै, प्रलैभानु कैसीभूषणकविता