यह छबि बाढ़ो री रजनीचाचा हितवृंदावनदासकवितायह छबि बाढ़ो री रजनी
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५ रचनाएँ

यह छबि बाढ़ो री रजनीचाचा हितवृंदावनदासकविता
हौं बलि जाऊँ, मुख सुख-रासचाचा हितवृंदावनदासकविता
देखा-देखी रसिक न ह्वैहैचाचा हितवृंदावनदासकविता
सोभा केहि बिधि बरनि सुनाऊँचाचा हितवृंदावनदासकविता
भजन भावना होय न परसीचाचा हितवृंदावनदासकविता