रस ही रस में रसबाद कछूचंद्रशेखर वाजपेयीकवितारस ही रस में रसबाद कछू
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१० रचनाएँ

रस ही रस में रसबाद कछूचंद्रशेखर वाजपेयीकविता
रोइ रिसाइ उठै कबहूंचंद्रशेखर वाजपेयीकविता
चंदन पंक गुलाब को नीरचंद्रशेखर वाजपेयीकविता
ये निकसीं निसि चाँदिनी मेंचंद्रशेखर वाजपेयीकविता
पंद्रह लोचन आनन पाँचचंद्रशेखर वाजपेयीकविता
बैस नई ब्रजबालन के संगचंद्रशेखर वाजपेयीकविता
देखि लयो तो कहूँ कतहूँ इनचंद्रशेखर वाजपेयीकविता
माया-महोदधि मैं भरमैं भजिचंद्रशेखर वाजपेयीकविता
फूलन की सेज में नवेली नंदलाल दोऊचंद्रशेखर वाजपेयीकविता
मंद मंद डोलत अनंदभरी मंदिर मेंचंद्रशेखर वाजपेयीकविता