मेरी सूचीपढ़ना शुरू करें

ऊधो! हमैं जोग नहिं भावै

पद · लगभग २ मिनट
ऊधो! हमैं जोग नहिं भावै।चित में बसत स्यामघन सुन्दर, सो कैसे बिसरावै?तुम जो कही सत्य सब बातें, हमरे लेखे धूरि।या घट-भीतर सगुन निरँतर रहे स्याम भरि पूरि॥पा लागौं कहियो मोहन सों जोग कूबरी दीजै।सूरदास प्रभु-रूप निहारैं हमरे संमुख कीजै॥२४१॥

अब कुछ और पढ़ें