हरि मेरा पीव भाई, हरि मेरा पीव, हरि बिन रहि न सकै मेरा जीव॥ टेक॥हरि मेरा पीव मैं हरि की बहुरिया, राम बड़े मैं छुटक लहुरिया।किया स्यंगार मिलन कै ताँई, काहे न मिलौ राजा राम गुसाँई॥अब की बेर मिलन जो पाँऊँ, कहै कबीर भौ जलि नहीं आँऊँ॥117॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+