दाजन दै दुर जीवन को अरु लाजन दै सजनी कल वारे।साजन दै मम को नव नेम निवाजन दै मन मोहन प्यारे॥गाजन दै ननदीन गुलाब विराजन दै उर में गुन भारे।भाजन दै गुरु लोगन को डर बाजन दै अब नेह नगारे॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+