अति चाह भरी जमुना जल को बरजेहु खिझे नित ऐयो करैं।सखियान की सीख सुनै न कछू अपनी कहिकै मुसकैबो करैं।युति दूनी बढ़ाय गुलाब कहै गुरु लोगन ते न सकैबो करैं।नव नागरी रूप उजागरी सो भरि गागरी क्यों ढरकैबो करैं॥

अति चाह भरी जमुना जल को
गुलाब सिंहसवैया · लगभग २ मिनट