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संकल ही तै सब लहै, माया इहि संसार

साखी · लगभग २ मिनट
संकल ही तै सब लहै, माया इहि संसार।ते क्यूँ छूटैं बापुड़े, बाँधे सिरजनहार॥२५॥

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