अब मैं आयो सरन तुम्हारी।भजन की मोहिं राम दुहाई, मडीयौ चरन मुरारी॥यहु संसार झूठ हम देख्या, तामहिं सचु नहिं भाई।राम भजन विचि अंतर पारै, बिषमहि देइ भुलाई॥भरम-करम का मना दिठावै, भरमावै अति भारी।नाव छुड़ाइ नरक में बोवै, ऐसे जीव विकारी॥झूठी काया झूठी माया, झूठा परपंच पसारा।जम की त्रास अधिक ता माहीं, तातै किया प्रहारा॥वोछी आ अलप जीवन प्रभु, विनसत नाहिन बारा।जन तुरसी सरनाई आयौ, देहु-देहु दीदारा॥

अब मैं आयो सरन तुम्हारी
तुरसीदास निरंजनीसबद · लगभग २ मिनट
