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लावौं बाबा आगि जलावौं घरा रे, ता कारनि मन धंधै परा रे

पद · लगभग २ मिनट
लावौं बाबा आगि जलावौं घरा रे, ता कारनि मन धंधै परा रे॥ टेक॥इक डाँइनि मेरे मन मैं बसै रे, नित उठि मेरे जिय को डसै रे।या डाँइन्स ले लरिका पाँच रे, निस दिन मोहि नचावैं नाच रे।कहै कबीर हूँ ताकौ दास, डाँइनि कै सँगि रहे उदास॥236॥

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