मारे मरै जु प्रेम के, ढूँढ़ फिरत ही लाल।जिन घट वेदन विरह की, ते क्यौं जियैं जमाल॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
कमरि वोढ़ति चतुर सखि, छोड़ दुशाले प्रीतजमालकविताकमरि वोढ़ति चतुर सखि, छोड़ दुशाले प्रीतजमाल२ मिनट का पाठ