मेरी अंखियन के भूषन गिरिधारी।बलि-बलि जाऊं मुखारविंद की, सुहृद सुहित सुखकारी॥सहज उदार प्रसन्न कृपानिधि, दरस परस दुखहारी।अतुल प्रताप तनिक तुलसीदास, मानत सेवा भारी॥छीतस्वामी नवरंग विसद जसु, गावति गोकुल नारी।कहा बरनौ गुन-गाथ नाथ कौ, श्री विठ्ठल हृदै बिहारी॥

मेरी अंखियन के भूषन गिरिधारी
छीतस्वामीपद · लगभग २ मिनट