है कोई राम नाम बतावै, वस्तु अगोचर मोहि लखावै॥ टेक॥राम नाम सब बखानै, राम नाम का मरम जाँनैं॥ऊपर की मोहि बात न भावै, देखै गावैं तौ सुख पावै।कहै कबीर कछू कहत न आवै, परचै बिनाँ मरम को पावै॥218॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+