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कबीर कूता राम का, मुतिया मेरा नाँउॅ

साखी · लगभग २ मिनट
कबीर कूता राम का, मुतिया मेरा नाँउॅ।गलै राम की जेवड़ी, जित खैंचे वित जाँउॅ॥१४॥

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