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हाशिया
कविता
कबीर कूता राम का, मुतिया मेरा नाँउॅ
कबीर
साखी · लगभग २ मिनट
कबीर कूता राम का, मुतिया मेरा नाँउॅ।
गलै राम की जेवड़ी, जित खैंचे वित जाँउॅ॥१४॥
॥
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कबीर कहै मैं कथि गया, कथि गया ब्रह्म महेस
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कबीर केवल राम कहि, सुध गरीबी झालि
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