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ग्वारि छबि बारी नई, बृजवारी बे तौर

दोहा · लगभग २ मिनट
ग्वारि छबि बारी नई, बृजवारी बे तौर।मालिन के पग परति क्यों, कह जमाल करि गौर॥

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