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तू करौ डर क्यूँ न करे गुहारि, तूँ बिन पंचाननि श्री मुरारि

पद · लगभग २ मिनट
तू करौ डर क्यूँ न करे गुहारि, तूँ बिन पंचाननि श्री मुरारि॥ टेक॥तन भीतरि बसै मदन चोर, तिकिन सरबस लीनौ छोर मोर॥माँगै देइ न बिनै मांन, तकि मारै रिदा मैं कांम बांन॥मैं किहि गुहराँऊँ आप लागि, तू करी डर बड़े बड़े गये है भागि॥ब्रह्मा विष्णु अरु सुर मयंक, किहि किहि नहीं लावा कलंक॥जप तप संजम सुंनि ध्यान, बंदि परे सब सहित ग्यांन॥कहि कबीर उबरे द्वे तीनि, जा परि गोबिंद कृपा कीन्ह॥385॥

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