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प्रेम-तृषा की ताप ‘ध्रुव’, कैसेहुँ कही न जात

दोहा · लगभग २ मिनट
प्रेम-तृषा की ताप ‘ध्रुव’, कैसेहुँ कही न जात।रूप-नीर छिरकत रहैं, तऊँ न नैन अघात॥

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