नैन चलैं नहिं सैंन सूं, नाँहिनि खुलै जमाल।जौं लौं रूखै दृग रहैं, तो लौं प्रीत जमाल॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+
त्रिपुर अटाँ चढ़ि चाह भरि, बीन बजावति बालजमालकवितात्रिपुर अटाँ चढ़ि चाह भरि, बीन बजावति बालजमाल२ मिनट का पाठ
जित-जित विकसित कंज कलि, तित-तित फिर नँदलालजमालकविताजित-जित विकसित कंज कलि, तित-तित फिर नँदलालजमाल२ मिनट का पाठ