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हाशिया
कविता
भीति गिरी पाषान की, अररानी वहि ठाम
रहीम
दोहा · लगभग २ मिनट
भीति गिरी पाषान की, अररानी वहि ठाम।
अब रहीम धोखो भयो, को लागै केहि काम॥१२९॥
॥
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भावी या उनमान की, पाण्डव बनहि रहीम
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भूप गनत लघु गुनिन को, गुनी गनत लघु भूप
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