झूम झूम चलत चहूंधा घन घूम-घूम,लूम-लूम भूप छ्वै-छ्वै धूम से दिखाते हैं।तूल कैसे पहल-पहल पर उठे आवैं,महल-महल पर से हिये सुहात हैं।ग्वाल कवि भनत परम तम सम केते,छम-छम-छम डारे बूंदै दिन-रात हैं।गरज गये हैं एक गरजन लागे देखो,गरजत आवै एक गरजत जात हैं॥ ॥साझा करेंसहेजेंअ−अ+