उचका-उचकी चढ़े पाट दुहूँग्वालकविताउचका-उचकी चढ़े पाट दुहूँ
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३७ रचनाएँ

उचका-उचकी चढ़े पाट दुहूँग्वालकविता
फूलि रही सरसों चहुँ ओरग्वालकविता
फाग मैं राग की लाग दिलीग्वालकविता
दिन द्वै तें बधू यह यों है सुनोग्वालकविता
विधि को सिर पंचम खंड भयोग्वालकविता
फाग की फैल करी मिलि ग्वालिनग्वालकविता
यह सावन आयो सुहावन हैग्वालकविता
ग्रीषम की गजब धुकी है धूप धाम-धामग्वालकविता
बरफ़ सिलान की बिछायत बनाय करिग्वालकविता
साजत पलंग पै उमंग भरी अंग-अंगग्वालकविता
ल्याई श्यामसुंदरै छबीलीग्वालकविता
दिया है ख़ुदा ने ख़ूब ख़ुशी करो ग्वाल कविग्वालकविता
आयो तू कहाँ तें, उपजायो कौन-कौन बिधिग्वालकविता
आइकै री राधिका, जमाइकै जुवति-जूथग्वालकविता
फूलि रही सरसों सरस खेत-खेत माँहिग्वालकविता
सोंह खाय साँची सो सुनाय हो सरोज नैनीग्वालकविता
झूम झूम चलत चहूंधा घन घूम-घूमग्वालकविता
द्वारे पर झूठ पछवारे पर झूठ झुक्योग्वालकविता
बरनि-बरनि ब्यासदेव भी थकित होतग्वालकविता
अंग में अनंग की उमंग उमगाई परैग्वालकविता
सीरे-सीरे नीर भये नदिन के तीर-तीरग्वालकविता
करि रति रीत बिपरीत मैं रचाई आजग्वालकविता
भान की तपन बन उपबनग्वालकविता
सरसों के खेत की बिछायत बसंती बनीग्वालकविता
जेठ को न त्रास जाके पास ये बिलास होयग्वालकविता
चंद बदनी के हद नीके सीतला के दाग़ग्वालकविता
धन है न तेरो कोऊ, तन है न तेरो इहाँग्वालकविता
चमचम चाँदनी की चमक चमकि रहीग्वालकविता
फागुन की फैल के गवैल औ’ डफैल लै-लैग्वालकविता
सिंधु तैं कढ़ी है किधौं बाड़वा अनल अबग्वालकविता
बाग बन डब्बे फब्बे फवनि अनेकन सोंग्वालकविता
आशा करि आये हैं मलिंद मतवारे मंजुग्वालकविता
और विष जेते तेते प्राण के हरैया होतग्वालकविता
प्यार सों पहिर पिसवाज पौन पुरबाईग्वालकविता
चाहिये ज़रूर इनसानियत मानस कोग्वालकविता
जिसका जितेक साल भर में ख़रच उसेग्वालकविता