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जेठ को न त्रास जाके पास ये बिलास होय

कवित्त · लगभग २ मिनट
जेठ को न त्रास जाके पास ये बिलास होय,खस के मवास पै गुलाब उछर्यो करै।जुही के मुरब्बे डब्बे चांदी के बरक भरे,पेड़े पाग केवरे में बरफ पर्यो करैं।ग्वाल कवि चंदन चहल में कपूर चूर,चंदन अतर तर बसन खर्यो करैं।कंज मुखी कंज नैनी कंज के बिछौनन पै,कंजन की पंखडी कर-कंज तैं कर्यो करैं॥

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