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यह सावन आयो सुहावन है

सवैया · लगभग २ मिनट
यह सावन आयो सुहावन है तरसावन मानसों भागि रहौ।जल धारन सों थल पूरि रहे सुर मींड़े मलारन रागि रहौ॥कवि ग्वाल दया करि देखौ इतै रिस दागन तें जिन दागि रहौ।अनुरागिरहौ निसि जागि रहौ रस पागि रहौ गल लागि रहौ॥

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