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फाग की फैल करी मिलि ग्वालिन

सवैया · लगभग २ मिनट
फाग की फैल करी मिलि ग्वालिन छैल विसाल रसालन ऊपर।लाल की लाल मुठी को गुलाल पर्यो उड़ि बाल के बालन ऊपर॥त्यों कवि ग्वाल कहै उपमा सुखमा रहि छाय सो ख्यालन ऊपर।पंख पसारि सुरंग सुआ उड्यो डोलै तमाल की डारन ऊपर॥

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