आशा करि आये हैं मलिंद मतवारे मंजु,उपवन वासी सुख पुंज सरसावेंगे।गुंजत गुमान तजि वाको सनमान कर,कर अपमान तो ज़रूर मुरझावेंगे॥ग्वाल कवि कहै तो मैं मृदुल सुगंध दोहु,याही को सुजस यह जग में बढ़ावेंगे।एरे ए गुलाब गुल ग़ालिब गुलों में यार,काँटे तन लाये हो तो फेर नहिं आवेंगे॥

आशा करि आये हैं मलिंद मतवारे मंजु
ग्वालकवित्त · लगभग २ मिनट