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शशि मुख सूखि गई तब तैं बिकल भई

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शशि मुख सूखि गई तब तैं बिकल भई,बालम बिदेशहू को चलिबो जबै कयो।दूध दही श्रीफल रुपैयो धरि थारि माहिं,माता सुत भाल जबै रोल कै टीको दयो॥ताँदुर बिसर गई वधु तें कह्यो ले आव,तब तैं पसीनो छूट्यो मन तन को तयो।ताँदुर ले आई तिया आँगन में ठाढ़ी रही,करके पसारवे में भात हाथ में भयो॥

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