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हाशिया
कविता
जनु अति नील अलकिया, बनसी लाय
रहीम
बरवै · लगभग २ मिनट
बैसिक
जनु अति नील अलकिया, बनसी लाय।
मो मन बार वधुअवा, मीन बझाय॥१०७॥
॥
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जनि मरु रोइ दुलहिआ, करि मन ऊन
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जमुना-तीर तरुनिअहि, लखि भौ सूल
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रहिमन जग की रीति, मैं देखा रस ऊख मैं
रहीम
कविता
रहिमन जग की रीति, मैं देखा रस ऊख मैं
रहीम
२ मिनट का पाठ
सुनि धुनि कान मुरलिआ, रागन-भेद
रहीम
कविता
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रहीम
२ मिनट का पाठ
इक नाहीं इक पीर, हिय रहीम होती रहै
रहीम
कविता
इक नाहीं इक पीर, हिय रहीम होती रहै
रहीम
२ मिनट का पाठ