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जब ते ब्रज तजि गये कन्हाई

पद · लगभग २ मिनट
जब ते ब्रज तजि गये कन्हाई।तब ते बिरह रबि उदित एकरस सखि! बिछुरन बृष पाई ।। 1 ।।घटत न तेज, चलत नाहिन रथए रह्यो उर नभ पर छाई।इन्द्रिय रूप रासि सोचहि सुठि सुधि सब की बिसराई ।। 2 ।।भया सोक भय कोक कोकनद भ्रम भ्रमरनि सुखदाई।चित चकोर, मन मोर, कुमुद मुद, सकल बिकल अधिकाई ।। 3 ।।तनु तड़ाग बल बारि सुखन लाग्यो परि कुरुपता काई।प्रान मीन दिन दीन दूबरेए दसा दुसह अब आई ।। 4 ।।तुलसीदास मनोरथ मन मृग मरत जहाँ तहँ धाई।राम स्याम सावन भादौं बिनु जिय की जरनि न जाई ।। 5 ।।

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