ससि तें सीतल मोकौं लागै माई री! तरनि।याके उएँ बरति अधिक अँग अँग दव, वाके उएँ मिटति रजनि जनित जरनि ।। 1 ।।सब बिपरीत भए माधव बिनु, हित जो करत अनहित की करनि।तुलसीदास स्यामसुंदर-बिरह की दुसह दसा सो मो पैं परति नहीं बरनि ।। 2 ।।

ससि तें सीतल मोकौं लागै माई री! तरनि
तुलसीदासपद · लगभग २ मिनट