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दीनबंधु दूसरो कहँ पावो ?

पद · लगभग २ मिनट
दीनबंधु दूसरो कहँ पावो ?को तुम बिनु पर-पीर पाइ है ? केहि दीनता सुनावों ॥ १ ॥प्रभु अकृपालु, कृपालु अलायक, जहँ-जहँ चितहिं डोलावों।इहै समुझि सुनि रहौं मौन ही, कहि भ्रम कहा गवावों ॥ २ ॥गोपद बुड़िबे जोग करम करौं, बातनि जलधि थहावों।अति लालची, काम-किंकर मन, मुख रावरो कहावों ॥ ३ ॥तुलसी प्रभु जियकी जानत सब, अपनो कछुक जनावों।सो कीजै, जेहि भाँति छाँडि छल द्वार परो गुन गावों ॥ ४ ॥

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