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और मोहि को है, काहि कहिहौं ?

पद · लगभग २ मिनट
और मोहि को है, काहि कहिहौं ?रंक-राज ज्यों मनको मनोरथ, केहि सुनाइ सुख लहिहौं ॥ १ ॥जम-जातना, जोनि-संकट सब सहे दुसह अरु सहिहौं।मोको अगम, सुगम तुमको प्रभु, तउ फल चारि न चहिहौं ॥ २ ॥खेलिबेको खग-मृग, तरु-कंकर है रावरो राम हौं रहिहौं।यहि नाते नरकहुँ सचु या बिनु परमपदहुँ दुख दहिहौं ॥ ३ ॥इतनी जिय लालसा दासके, कहत पानही गहिहौं।दीजै बचन कि हृदय आनिये ‘तुलसिको पन निर्बहिहौ’ ॥ ४ ॥

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